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जानिए कौन हैं अर्जन नागवासवाला, जिन्हें WTC फाइनल और इंग्लैंड दौरे के लिए टीम इंडिया में मिली जगह

<p>शुक्रवार को भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले और इंग्लैंड के खिलाफ खेली जाने वाली पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ के लिए टीम इंडिया का एलान किया है. बीसीसीआई ने इस दौरे के लिए कुल 20 सदस्यीय टीम की घोषणा की. साथ ही चार खिलाड़ियों को स्टैंडबाय के रूप में भी टीम में शामिल किया. स्टैंडबाय के रूप में चुने गए खिलाड़ियों में से एक नाम सभी को चौंका रहा है. दरअसल, बीसीसीआई ने रणजी ट्रॉफी में गुजरात का प्रतिनिधित्व करने वाले लेफ्ट आर्म तेज़ गेंदबाज़ अर्जन नागवासवाला को इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में स्टैंडबाय गेंदबाज के रूप में चुना है. आइए जानते हैं कौन है यह खिलाड़ी.&nbsp;</p>
<p>गुजरात के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले लेफ्ट आर्म तेज़ गेंदबाज़ अर्जन नागवासवाला का जन्म 17 अक्टूबर, 1997 को गुजरात के सूरत में हुआ था. उन्होंने गुजरात के लिए ही अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 क्रिकेट खेला. हालांकि, उनको पहचान 2008 में मिली, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी के अपने डेब्यू मैच में मुंबई के खिलाफ पांच विकेट चटकाए.&nbsp;</p>
<p>नागवासवाला ने टीम इंडिया में शामिल होने को लेकर कहा, "इस खबर को सुनने के बाद मैंने सबसे पहले मां और पिताजी को फोन किया. मैं बहुत रोमांचित था. मैं सड़क पर नहीं रुक सकता था क्योंकि कोविड-19 प्रोटोकॉल आपको कार से बाहर निकलने की अनुमति नहीं देता है."</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी. हर किसी को भरोसा था कि मुझे एक दिन न एक मौका मिलेगा. मुझमें भी वह आत्मविश्वास था. (लेकिन) यह बहुत अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक था."</p>
<p>रणजी ट्रॉफी में गुजरात का प्रतिनिधित्व करने वाले इस तेज गेंदबाज ने 16 प्रथम श्रेणी मैचों में 62 विकेट लिए हैं. इसके अलावा उन्होंने 2019-20 के रणजी ट्रॉफी सीजन में सिर्फ आठ मैचों में 41 विकेट चटकाए हैं.&nbsp;</p>
<p>नागवासवाला 46 साल बाद पारसी समुदाय से भारत के मुख्य टीम में पहला क्रिकेटर बन सकते हैं. उनसे पहले 1975 में फारूख इंजीनियर थे. उन्होंने कहा, "पारसियों द्वारा क्रिकेट और भारत के लिए खेलने वाले क्रिकेटरों के योगदान के बारे में पता है. जैसा कि मैंने रणजी ट्रॉफी खेलना शुरू किया, मुझे एहसास हुआ कि मैं अकेला था. जिस दिन मैंने रणजी ट्रॉफी खेली, मुझे पता चला कि उस समय रणजी ट्रॉफी में कोई पारसी क्रिकेटर नहीं खेल रहा था."</p>
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